इस कहानी का किसी व्यक्ति, स्थान से संबंध नहीं है। यह पूर्णतया काल्पनिक है।
भाग -1
सन् 1986...
राजस्थान के ग्रामीण अंचल में दूर दराज में स्थित.... शहरी जीवन से परे... एक शांत गांव... भौंरा गढ़। जहां सर्दियों की ठंडी रातों में जलते अलाव के पास बैठे लोग किस्से - कहानियों से अपना मन बहलाते हैं।
अक्सर ये मन बहलाते किस्से पुराने राजा - रजवाड़ों से ताल्लुक रखते हैं... या गांव की खास घटनाओं से जुड़े होते हैं.... या फिर सबसे रोमांचक विषय होता है भूत प्रेत !
ऐसे ही किस्सों में मशहूर है ....
’एक भयानक दास्तान’
भौंरा गढ़ के एक सामान्य किसान की बेटी 'पतिया'। यौवन की दहलीज पर खड़ी 17 साल की एकदम अल्हड़ सी मासूम सी लड़की।
पास के गांव के मुखिया का बेटा चंदू शहर में कुछ काम करता था। वो कुछ दिनों के लिए गांव आया था। गांव के मेले में उसने पहली बार देखा पतिया को। पतिया उसे पहली नजर में भा गई थी। धीरे धीरे दोनों में जान पहचान हो गई। मिलना जुलना हुआ और प्रेम परवान चढ़ गया । लेकिन पतिया और चंदू के परिवार दोनों इस रिश्ते के खिलाफ थे। ये बात पतिया और चंदू भी जानते थे कि उनके इस रिश्ते को कभी मंजूरी नहीं मिल सकेगी। एक दिन चंदू ने पतिया को उसके साथ भाग जाने को कहा। पतिया उसकी बातों में आ गई। चंदू के कहे अनुसार घर से सारे गहने और नकदी लेकर वो रात को भाग निकली। गांव के बाहर चंदू तैयार खड़ा था।
"आ गई???"
"हां, बड़ी मुश्किल से आई हूं। सबसे छुपते छुपाते।"
"जो बोला वो सब लाई हो ना?"
"हां.. हां... सब लाई हूं।"
"बस... अब हम शहर में जाकर आराम से रहेंगे। तुझे रानी बनाकर रखूंगा मैं!"
ये सुन कर पतिया के चेहरे पे मुस्कान छा गई।
चंदू उसे लेकर खेतों के रास्ते जाने लगा। पतिया उसके पीछे पीछे चल दी।
अचानक चंदू रुक गया।
"क्या हुआ? रुक क्यों गया चंदू???" पतिया ने पूछा।
"बस... यहां तेरा सफर खत्म।" चंदू कुटिल मुस्कान के साथ बोला।
"क्या मतलब??" पतिया घबराई आवाज में बोली।
"मतलब अब अगले जनम में समझ लेना।" कहते हुए चंदू ने उसका गला दबा दिया।
पतिया छटपटाने लगी। उसे यकीन नहीं हो रहा था। चंदू ऐसा करेगा। मरने से ज्यादा उसे अपने प्यार पे अफसोस हो था था। वो इस बात पे ज्यादा दुखी थी कि चंदू ऐसा निकला। जिस पर उसने अपना सब कुछ लुटा दिया। तन मन धन... खानदान की इज्जत। सब कुछ जिसके लिए दांव पर लगा दिया उसने उसे इस तरह धोखा दिया।
पतिया के मुंह से कोई शब्द नहीं निकला पा रहा था। बस आंखों से आंसू बह रहे थे। छटपटाहट तेज होती गई और फिर सब कुछ शांत हो गया। पतिया मर गई। चंदू ने उसकी लाश पास बने कुएं में डाल दी और फरार हो गया।
दरअसल चंदू एक नशेबाज सट्टे बाज लड़का था। शहर में बुरी लत लग चुकी थी। सब कुछ बर्बाद कर के गांव आया था। पतिया को देख कर उसने ये सारी योजना बना ली थी। पतिया को फसाकर सारा जेवर और नकदी लेकर वो शहर भाग गया।
इधर कुछ दिनों से पतिया का कोई अता पता नहीं था। पतिया के बाप ने पुलिस में जाना उचित नहीं समझा। घर से जेवर गायब थे। लड़की खुद घर से भागी है... समाज में इज्जत जाने का डर था। इसलिए सब चुप थे।
उस सूने कुएं की तरफ आवागमन बहुत ही कम होता था। काफी दिनों बाद एक शाम एक गडरिया भेड़ों को चराते चराते उस तरफ गया। कुएं पर मंडराते कौवों और दुर्गंध ने उसका ध्यान उस तरफ खींचा। उसने कुएं में झांक कर देखा तो उसके होश उड़ गए। बुरी तरह सड़ी गली लाश देख कर और दुर्गंध से उसको मितली आने लगी। वह तेजी से गांव की तरफ भागा। लेकिन रास्ते में ही सदमे से अचेत होकर गिर पड़ा।
जब उसे होश आया... अंधेरा घिर चुका था। वह उठा.... गिरते पड़ते गांव तक पहुंचा।।
गांव पहुंच कर गडरिया जोर से चीखा। ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। घबराहट के मारे शब्द नहीं निकल रहे थे। बड़ी मुश्किल से बोला.... "ल... ल... लाश... कुएं में लाश...।।"
गांव वाले चौंक पड़े। उसे थोड़ा संयत किया गया। थोड़ी देर में गडरिया थोड़ा ठीक हुआ। जो कुछ उसने बताया उसे सुन कर गांव वाले बुरी तरह हैरान हो उठे। सब के सब... जिसने भी सुना सब के सब उस तरफ दौड़ पड़े। हाथों में मशालें... टॉर्च... लालटेन लिए। कुएं के पास जा के देखा।।। भयानक दुर्गंध उठ रही थी वहां। लेकिन अंधेरे में कुएं के अंदर कुछ नहीं दिख रहा था।
सबने सुबह तक वहीं इंतजार करने की ठानी। कुछ दूरी पे जाकर सुबह होने का इंतजार करने लगे वो। सबने कुएं को घेर रखा था। कोई बाहरी आदमी कुएं तक नहीं पहुंच सकता था। आखिर सुबह हुई। सबने एक साथ जाकर देखा। भयंकर झटका लगा उन्हें। कुएं में कोई लाश नहीं थी।
सबने गड़रिए को पकड़ा।
"क्यों रे!!! तू तो बोल रहा था कुएं में लाश है! कहां हैं लाश??"
"म... म... मैंने अपनी आंखों से देखी है। रात को भयानक बदबू भी तो आ रही थी।"
"तो फिर कहां चली गई लाश। रात से कोई आया भी तो नहीं कुएं के पास???"
गांव वाले हैरान परेशान हो गए। गडरिया गांव का ’ठीमर’ आदमी था। उस पर कोई संदेह नहीं कर सकता था। आखिर गांव वाले वापस लौट आए। कई दिनों तक ये चर्चा का विषय बना रहा।
पूरा गांव हतप्रभ था। रातों रात लाश कहां गायब हो गई।
गांव वाले लौट गए। कुछ दिनों तक यही चर्चा होती रही। गांव से पतिया गायब थी। लोगों ने इस घटना को पतिया से जोड़ दिया। उनका अंदाजा सही भी था।
एक दिन शाम को गांव का एक लकड़हारा मंगलू लकड़ियां काटते हुए उसी कुएं की तरफ गया। शाम तक काफी थक चुका था। बड़ा सा गट्ठर बांध लिया था उसने। थका हारा थोड़ी देर वहीं बैठ गया। शाम का धुंधलका गहराने लगा। पर ठंडी ठंडी हवा में उसका उठने का मन नहीं कर रहा था। तभी... उसने कुछ आहट सुनी। एक हल्की सी आहट... किसी के पायल खनकने की। उसने पीछे घूम के देखा। पर कोई नहीं दिख रहा था। आवाज आती जा रही थी। मानो कोई उसी की तरफ बढ़ रहा हो। तभी वहां बरगद के पेड़ के पीछे से एक सांया उभरा। मंगलू को लगा गांव की कोई औरत है। उसने आवाज लगाई।
"कौन है उधर?"
"गांव चलना है क्या?"
सांया धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ा। मंगलू अपनी जगह पर खड़ा रहा। उसे साफ साफ नहीं दिख रहा था। सोचा पास आएगी तब पूछ लेगा कि कौन है?!
साया बहुत धीरे धीरे बढ़ता आ रहा था। लड़खडाते हुए। मंगलू खुद उसके पास चला गया। और बोला
"कौन हो...बाई ??? इस वक्त यहां क्या कर हो??? गांव चलना है क्या??"
जवाब में बस एक गुर्राहट उभरी। और एक भयानक पंजा मंगलू की गर्दन पर कस गया। मंगलू चिल्लाने लगा। उस साए की सूरत से घूंघट हटा... और मंगलू की आत्मा कांप उठी। बेहद भयानक शक्ल लिए... एक प्रेतनी गुर्रा रही थी। उसके लंबे नाखून मंगलू की गर्दन में धंस गए और मंगलू की जीवन लीला वही समाप्त हो गई। अगले दिन मंगलू की लाश मिली। पूरे गांव में हंगामा मच गया। मंगलू की लाश देख कर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
पुलिस बुला ली गई।
लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
पुलिस पूछ ताछ कर के लौट गई। घटना को किसी जंगली जानवर का हमला नाम दे दिया गया।
दरअसल वो सुनसान रास्ता सड़क तक जाने का पगडंडी नुमा छोटा रास्ता था। शहर से आने जाने वाली ’बस’ गांव में नहीं आती थी। सड़क पर उतार देती और गांव वाले उस छोटे रास्ते से ही गांव से बस तक पैदल आना जाना करते थे।
कुछ ही दिनों बाद गांव का एक लड़का सोहन रात को शहर से आया। किसी ट्रैक्टर वाले ने उसे सड़क पर छोड़ दिया था। वहां से वो पैदल रवाना होकर उसी छोटे रास्ते से गांव की तरफ बढ़ रहा था। रात के 10 बज चुके थे। चलते चलते कुएं तक पहुंचा वो। तभी किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा.... "सोहन.... सोहन...... " और एक खनकदार हंसी गूंज उठी।
सोहन चौंक गया। रात के वक्त इस जगह पर कौन उसे पुकार सकती है। उसने ध्यान लगाया। आवाज कुएं से आती प्रतीत हुई उसे??गांव में कुछ भूतिया किस्से पहले से सुन रखे थे उसने। वो भांप गया कि आज कोई डायन उसके पीछे लगी है। वो भागा... तेजी से भागा। लेकिन वो आवाज उसके कानो में सुनाई देती जा रही थी। मानो उसके एकदम पास से उसे कोई बुला रहा हो।
वो हांफने लगा। थक कर उसे रुकना पड़ा। हंसी की आवाज फिर से गूंजी। उसने पीछे मुड के देखा। वही भयानक प्रेतनी ठीक उसके पीछे खड़ी थी। वो कुछ बोल पाता उस से पहले ही वो उसे खींच ले गई कुएं में। अगले दिन गांव में फिर हंगामा मच गया। सोहन की लाश कुएं में मिल गई थी। गांव वाले सहम उठे। पुलिस कुछ कर नहीं पा रही थी । गांव वालों ने कुएं की तरफ जाना प्रतिबंधित कर दिया।
इसके बावजूद कोई अभागा अंजान आदमी उस प्रेतनी का शिकार हो ही जाता।
गांव में हवा फैल गई। उस रस्ते पर ’पतिया’ घूमती है। लोगों को मार देती है।
इस केस से पुलिस भी बुरी तरह परेशान थी।
पुलिस के लिए बहुत बड़ा सरदर्द बन चुका था ये केस। आखिर पुलिस का एक स्पेशल जवान इंस्पेक्टर कपिल को तैनात किया गया उस गांव में। उसकी ड्यूटी थी गांव में हो रही हत्याओं का सबूत सहित पता लगाना और ऐसी घटनाओं के रोकना। कड़क स्वभाव और गजब का बहादुर इंस्पेक्टर था कपिल। 2-3 दिन गांव में रह कर जानकारी ली उसने। जो कुछ जानकारी ले रहा था उसे नोट करता गया। एक फाइल बना ली उसने। बस अब उसने उस सुनसान रस्ते वाले कुएं के पास छन बीन करने की सोच ली। एक रात वो उस कुएं के पास जा पहुंचा। ये देखने कि आखिर माजरा क्या है? छुपते छुपाते गया था वो। बिना किसी को कुछ बताए।
जैसे ही वो वह पहुंचा। उसे भी उसी तरह आवाज आने लगी। पायल की। खनक दार हंसी। उसका नाम लेकर पुकारा जाने लगा उसे। वो अचंभित रह गया। तभी उसे लगा कोई उसके पीछे खड़ा है। जैसे ही वो पलटा... वो भयानक डायन उसके पीछे खड़ी मुस्कुरा रही थी। कपिल घबरा गया उसे देखकर... और अगले ही पल उस डायन ने उसका गला दबा दिया। अगले दिन गांव वालों को कपिल की लाश मिली। पुलिस में हड़कंप मच गया। इंस्पेक्टर की हत्या हो जाना कोई मामूली घटना नहीं थी।
अब कोई पुलिस वाला इस केस में हाथ डालने को तैयार नहीं था।
3 साल बीत गए। ये केस फाइलों में दब गया। गांव वालों को उनके भाग्य भरोसे छोड़ दिया गया। अब भी उस गांव में भयानक हत्याएं होती रहती। उस रस्ते पर जो भी जाता... वापस नहीं आता। कोई न कोई अंजान आदमी वहां शिकार हो ही जाता।
पुलिस बस मूक दर्शक बनी बैठी थी। केवल पंचनामा कर के खानापूर्ति कर देती। लेकिन इस केस को सॉल्व करने का साहस किसी में नहीं था।
आखिर 3 साल बाद.... उस इलाके के थाने में नियुक्त हुई एक नई लेडी इंस्पेक्टर रजनी। जब उसके सामने ये केस आया तो उसने ये केस हाथ में लेने की ठान ली। फर्स्ट पोस्टिंग... नया जोश.... पूरे पक्के इरादे के साथ भौंरा गढ़ पहुंच गई वो।
भौंरा गढ़ में ही रहने का ठिकाना कर लिया । इस केस के सिलसिले में ऑन ड्यूटी यहीं रहने की परमिशन मिल गई थी उसे। कई दिनों तक गांव में लोगों से मिली। काफी मदद उसे इंस्पेक्टर कपिल की फाइल से मिल गई थी। बाकी जानकारी गांव में रह के जुटाई। दिन में उस सुनसान रस्ते का मुआयना किया। कुएं का जायजा लिया। लेकिन अभी भी गुत्थी सुलझ नहीं पा रही थी।
उसने भी ठान ही ली कि अगर ये केस सॉल्व करना है तो रात को कुएं के पास आना ही पड़ेगा।
कौन मार रहा है लोगों को?? आखिर इस रस्ते पर क्यों हो रही है मौतें?? क्या रहस्य है इस खूनी रस्ते का??? ये सब जान ने के लिए रात में यहां आना जरूरी है।। क्योंकि सारी मौतें यहां रात को हुई है।
क्या इंस्पेक्टर रजनी इस केस को सॉल्व कर सकी??? क्या वो खूनी चुडैल के पंजे से बच सकी?? क्या भौंरा गढ़ गांव इस भयानक मुसीबत से मुक्त हो सका।??? जान ने के लिए इंतजार कीजिए अगले अंक का......
भाग - 2
पिछले अंक में अपने पढ़ा.....
जांबाज लेडी इंस्पेक्टर रजनी राठौड़ भौंरा गढ़ केस के सिलसिले में अपनी जांच पड़ताल शुरू कर चुकी थी और रात उस भयानक कुएं के पास जाने की सोच चुकी थी।
अब आगे....
दिन भर इंतजार करने के बाद... जब शाम का धुंधलका गहराने लगा... तब... इंस्पेक्टर रजनी अपनी जीप लेकर निकल पड़ी उस रस्ते पर... जहां से वापसी शायद नामुमकिन थी। दिल धाड़ धाड़ बज रहा था उसका। गजब की ठंड थी लेकिन उसके माथे पर पसीना छलक रहा था। उस कच्चे रास्ते पर रेंगती जीप के ब्रेक लग गए... उस कुएं के पास आकर। हल्की सी घबराहट के साथ जमीन पर पैर टिके इंस्पेक्टर रजनी के। अपने भय और आशंकाओं पर गजब का काबू किए हुए थी वो। मन में ठान चुकी थी कि जो होगा देखा जाएगा। हाथ में रिवॉल्वर चमक उठा उसके। जीप की हैडलाइट में कुएं का एरिया देखा जा सकता था।
तभी रजनी को एक आहट सुनाई दी। वो चौकन्नी हो गई। कुएं से कुछ आवाज उभरी। एक भयानक गुर्राहट ... पायल खनकने की आवाज... और कुएं के बाहर एक हाथ निकला... भयानक लंबे नाखून वाला वीभत्स पंजा। रजनी की आंखे फैलती गई और फिर निकली वो भयानक सूरत जिसने पूरे गांव ने दहशत मचा रखी थी। रजनी भय से जड़ हो के रह गई। उसक मुंह से स्वर तक नहीं निकल पा रहा था। साक्षात मौत उसके सामन खड़ी थी। लेकिन आश्चर्य.... वो डायन आगे नहीं बढ़ी... बस रजनी को देखती रही।अचानक उसका पंजा रजनी के गले पर कस गया.. और... एक भयानक गुर्राहट भरी आवाज में बोली.... "शुक्र कर... तू औरत जात है... जो मर्द होती तो तेरा खून पी जाती... हाsssss"
रजनी ने खुद को संभाला। हिम्मत कर के बोली... " क... क.. कौन हो तुम?? यहां से निकलने वाले राहगीरों को क्यों मार रही हो?? क्या गांव में मैंने जो कुछ सुना वो सच है??? "चुडैल का पंजा हट गया... वो बोली...." हां... जब तक एक एक मर्द जात का खून न पी जाऊं... मुझे शांति नहीं मिलेगी।"
"लेकिन क्यूं?? क्यूं कर रही हो ये सब???" रजनी ने हल्के से पूछा।
रजनी ने फिर से हिम्मत जुटाई ..." देखो मुझे बताओ... क्या हुआ ऐसा जो तुम्हारी ये हालत हो गई??
मुझे बताओ बहन। मैं भी एक औरत हूं। मुझे बता दो। मैं पुलिस ऑफिसर भी हूं... मैं वादा करती हूं... तुम्हे इंसाफ दिलाऊंगी।"
चुडैल फिर से गुर्राई और फिर उसकी आवाज में दर्द झलक उठा....
और उसने फ्लैशबैक में अपने साथ हुई बेवफाई की कहानी रजनी को सुनाई।
" जब तक मैं एक एक मर्द जात का खून न पी जाऊं मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी.... हार्ररररररररर sssss"
"किसी एक दुष्ट का दंड पूरी मर्द जात को देना तो गलत है बहन... मैं वादा करती हूँ... तुम्हे मुक्ति दिलाऊंगी। तुम्हे इंसाफ दिलाऊंगी। चाहे कुछ भी करना पड़े। सारी हदें तोड़नी पड़े।"
उस से वादा कर के रजनी लौट आई गांव। जो कुछ हुआ सब सपना सा लग रहा था। मन अभी भी विश्वास नहीं कर रहा था कि कोई मर के भी इस दशा में रह सकता है.... भूत प्रेत जैसी चीजें सच में है??? लेकिन जो कुछ उसने देखा .... सुना... वो भी तो गलत नहीं था
अगले दिन रजनी शहर की तरफ रवाना हो गई। विभाग से कुछ दिनों की छुट्टी लेकर गई वो। उसका ऑफिशियल केस अब अनऑफिशियल हो चुका था।
शहर जा कर उसने चंदू की तलाश शुरू कर दी। गांव से उसका पता लेकर निकली थी वो लेकिन शहर में वो उस पते पर नहीं मिला। शायद रहने की जगह बदल ली थी उसने। पूछ ताछ करते करते आखिर उस तक पहुंच ही गई रजनी। चंदू पतिया के गहने - पैसे सब कुछ शराब और जुए में उड़ा कर किसी गंदी बस्ती में रह रहा था। जब रजनी उसके पास पहुंची तो वो शराब के नशे में धुत होकर ठेके पर पड़ा था।रजनी ने उसे पकड़ा और जीप में डाल दिया। नशे की हालत में उसने हाथ पैर मारे लेकिन रजनी ने उसकी बुरी तरह पिटाई कर के सारा नशा उतार दिया। इस घटना का उस शहर पर कोई असर नहीं पड़ा। चंदू जैसे जाने कितने लोग गायब होते थे शहर से। रात होते होते रजनी उसे गांव के उसी रास्ते पर ले आई। चंदू का सारा नशा अब उतर चुका था। रजनी ने उसे धक्का देकर जीप से गिरा दिया और जोर से आवाज लगाई... "तुम्हारा अपराधी तुम्हारे सामने है पतिया .... जो सजा देनी है आज दे दो इसे... और विनती है तुम से कि आज के बाद इस गांव में ... इस रास्ते पर... इस कुएं के पास... अब कोई निर्दोष ना मारा जाए।" हाथ जोड़ते हुए रजनी ने जीप स्टार्ट कर दी।
चंदू हतप्रभ था। वो चिल्लाने लगा.... "अरे मुझे यहां छोड़ कर कहां जा रही हो.... यहां क्यों लाकर पटका मुझे????"
तभी चंदू खामोश हो गया.... उसके पीछे आहट सुन कर।
वो भयानक चुडैल आंखों में अंगारे लिए खड़ी थी। चंदू उसका रूप देख कर सहम उठा। उसके मुंह से घिघियाया हुआ स्वर निकला।
चुडैल के मुंह से गुर्राहट निकली..."चंदू??? आखिर तू आ ही गया.... ही ही ही.... मैंने तो तुझसे प्रेम किया था ना??? तूने तो मुझे पहचान लिया होगा ??? ही ही ही.... मैं वही पतिया हूँ.... जिसके प्रेम का तूने गला घोंट दिया था। आज तुझे ऐसी मौत मिलेगी कि कोई किसी के साथ विश्वासघात नहीं करेगा। ही ही ही.....
चंदू की आंखों के आगे अंधेरा छा गया.... उसके होश फाख्ता थे...
"प... प.... पतिया??? तू...तू... वापस कैसे आई??? नहीं... ये नहीं हो सकता...."
बुरी तरह गुर्राती वो भयानक चुडैल उसकी तरफ बढ़ने लगी। चंदू जमीन पे गिरा हुआ रेंगने लगा। पतिया ने उसका पैर पकड़ लिया। चंदू भय से चिल्ला उठा... "नहीं ssss... पतिया मुझे माफ कर दे। मुझे माफ कर दे।" बुरी तरह रुलाई छूट रही थी उसकी।
लेकिन पतिया ने उसे नहीं छोड़ा। वो सूना रास्ता चंदू की चीखों से गूंज उठा।
अगले दिन गांव वाले रजनी के साथ कुएं के पास आए। कुएं में चंदू की क्षत विक्षत लाश तैर रही थी। उसे बुरी तरह नोच दिया गया था। हड्डियां तका तक पूरे शरीर में इधर से उधर कर दी गई थी।
रजनी ने गांव वालों को सारी हकीकत बता दी। हर गांव वाले की आंख में आंसू था। डर अब हमदर्दी में बदल चुका था। चंदू की लाश का अंतिम संस्कार कर गांव वाले लौट गए।
अगली रात जब रजनी उस कुएं के पास पहुंची... तो वहां शांति छाई हुई थी। किसी तरह का कोई डर नहीं... कोई आहट नहीं.... बस एक दम शांति।।।
अब उस रस्ते पर छाया अभिशाप हमेशा के लिए हट चुका था। पतिया की तड़पती आत्मा को शांति मिल चुकी थी।
पूरा गांव इंस्पेक्टर रजनी का एहसान मंद था। चंदू गांव कैसे पहुंचा ये राज राज ही रहा। पूरे गांव ने अपने होंठ सी लिए। आंखों में नमी लिए उस गांव से विदा हुई इंस्पेक्टर रजनी.... उसकी जीप जब उसी रास्ते से गुजर रही थी तो उसे लगा मानो पतिया मुस्करा के देख रही थी उसे।
अब फिर से खुल गया वो रास्ता.... बिना किसी डर के....
समाप्त।
No comments:
Post a Comment