Thursday, 27 January 2022

हत्यारा प्रयोग पार्ट-2

अब तक आपने पढ़ा....

प्रो. अवतार सिन्हा के पागलपन से जिंदा हुआ गब्बार नाम का वो 'मुर्दा' ज़िंदा होकर प्रो. का ही काल बन गया। प्रो. का दोस्त और सहयोगी तांत्रिक कपाल मौका देख कर फरार हो चुका था। पुलिस अवतार सिन्हा के कॉटेज तक पहुंची.. लेकिन इस गुत्थी को नहीं सुलझा पाई। .... अब आगे.....



प्रो. का कॉटेज जिस गांव से सटा हुआ था उस गांव का नाम था गोरमगढ़। कोई नहीं जानता था कि पहाड़ियों से घिरे उस शांत गांव पर तबाही के बादल फटने वाले थे। सर्दियों की ठंडी शाम के बाद गहराता रात का धुंधलका गांव के रास्ते सुनसान कर देता था। हर कोई घर जल्दी पहुंच जाना चाहता था। सड़क के दोनों और लगे विशाल पेड़ प्रेत  की भांति प्रतीत होते। ऐसी ही एक सुनसान सी सड़क पर गांव का एक साईकल सवार तेजी से पेडल मारते हुए गांव की तरफ बढ़ रहा था। देर हो जाने का भय उसके चेहरे से साफ झलक रहा था। अचानक कर्रर्रर्ररsssss.... की आवाज के साथ साईकल की चैन उतर गई। बदनसीब साईकल सवार साईकल खड़ी कर के चैन चढ़ाने लगा। तभी एक आहट ने उसका ध्यान खींच लिया। कड़कड़ाती ठंड में भी पसीना उतर आया उसके माथे पर। वो खड़ा होकर आहट की दिशा में घूरने लगा। खड़ड़ड़.... कड़ड़ड़... की धीमी पदचाप टहनियां कुचलती हुई उसकी तरफ बढ़ रही थी। एकाएक कम्बल में लिपटा हुआ एक साया झाड़ियों के पीछे से उभरा। भयानक सी फुफकार निकल रही थी उस साये के मुंह से। साईकल सवार भय से जड़ होकर रह गया। साया धीमी चाल से उसकी तरफ बढ़ने लगा।साईकल सवार घिघियाये स्वर में चिल्ला उठा। भागने के लिए उसके पैर ही नहीं उठ पा रहे थे। साया उसके बिल्कुल करीब आ चुका था। दो मोटे, भारी भरकम नीले पड़ चुके हाथ उसकी गर्दन पर आ जमे।साईकल सवार का शरीर हवा में उठ गया। उसकी आंखें बाहर निकलने लगी... जीभ बाहर लटकने लगी..... गले से घुटी हुई सी चीख निकली... पैर छटपटाने लगे। धीरे धीरे उसका शरीर शांत पड़ गया। साए ने उसकी लाश को कंधे पर डाला और झाड़ियों में खो गया। 

अगले दिन गांव का माहौल गरमाया हुआ था। साईकल सवार, जिसका नाम बिरजू था, के गायब होने  से सनसनी फैली थी। उसकी साईकल सड़क पर मिल गयी थी। सब जगह ढूंढ लिया गया पर वो ना मिला। दो तीन दिन बाद ही खेत की रखवाली करने गया मोहन गायब हो गया। गोरम गढ़ में भय व्याप्त हो गया। पुलिस बुला ली गयी। लेकिन कोई कामयाबी अब तक हाथ नहीं लग पा रही थी। पुलिस पार्टी खाली हाथ लौट गई। लेकिन लोगों के गायब होने का सिलसिला नहीं रुका। 4-5 लोगों के और गायब होने की सूचना पर पुलिस दोबारा गोरमगढ़ पहुंची। शिकारियों का सहारा लिया गया। जंगल की खाक छान ली गई। मगर नतीजा 'ढाक के तीन पात' रहा। पुलिस इंस्पेक्टर  दिमाग चक्करघिन्नी सा हो गया था। एक भी सुराग नहीं लग पा रहा था। वापस थाने लौटकर भी इंपेक्टर को चैन नहीं मिला। वो परेशान सा इसी केस के बारे में सोच रहा था। तभी थाने में उससे मिलने आया उसका एक दोस्त... डिटेक्टिव द्रोण... जो पेशे से एक खुर्राट प्राइवेट जासूस था। जिसे देखते ही इंपेक्टर कि सारी परेशानी काफूर हो गई।
"क्या बात है इंस्पेक्टर?? आज बड़े परेशान लग रहे हो?" द्रोण ने इं. के चेहरे पर उड़ती हवाइयां देखकर पूछा।

"क्या करूँ यार!! इस गोरमगढ़ वाले केस ने तो नाक में दम कर रखा है।"

परेशान स्वर में इं. आगे बोला...
"अभी कुछ दिन पहले अवतार सिन्हा के कॉटेज में उनकी लाश मिली थी और अब उसी गांव में लोग गायब होने लग गए है.... आज ही गोरमगढ़ जाकर आया हूं... लेकिन कहीं कुछ नहीं मिल रहा।" 
"क्या तुम पुलिस की कुछ मदद कर सकते हो द्रोण???" इं. ने द्रोण की तरफ देखते हुए कहा।
K
"ज़रूर यार!! पुलिस की मदद करने के लिए तो बन्दा हमेशा तैयार रहता है।"
"तुम मुझे जो जानकारी हो सकती है दे दो।"
इं. ने केस की फ़ाइल की एक कॉपी द्रोण को दे दी।

डिटेक्टिव द्रोण ने पूरे केस को गहनता से पढ़ने के बाद निष्कर्ष निकाला...
" ह्म्म्म..! लगता है इस केस की तफ्तीश के लिए सबसे पहले मुझे गोरमगढ़ जाना ही पड़ेगा.... पता नहीं क्यों मेरा मन कहता है कि प्रो. अवतार सिन्हा और गोरमगढ़ केस में कुछ न कुछ लिंक ज़रूर है।"
अगले ही दिन द्रोण अपनी जीप और ज़रूरी सामान लेकर गोरमगढ़ की ओर निकल पड़ा। पहाड़ी रास्ते को पार कर जब वो गोरमगढ़ पहुंचा तो तो वहां विलाप मचा था...

" हाय मेरा छगन... कहाँ चला गयाssss। ???" "कोई उसे वापस ला दो....!!!" रोते रोते वो महिला पछाड़ खा के गिर पड़ी।
 
द्रोण ने मामला जानने की कोशिश की तो किसी ने बताया...
"इस औरत का लड़का छगन कल रात से ही गायब है साहब। खेत पर गया था वो। वापस ही नहीं लौटा, न ही कोई खोज खबर है। न जाने किसकी नज़र लग गयी है गांव को.... लेकिन आप कौन है साहब??" उस आदमी ने अपनी नम आंखे पोछते हुए पूछा।

" मैं एक पत्रकार हूं बाबा। आपके गांव के हालात सुनकर ही यहां आया हूँ। यहां हो रहे घटनाक्रम को अखबार में छपवाऊंगा... तांकि सरकार, पुलिस गंभीरता से गांव के बारे में सोचे। उम्मीद है आप सब मेरा सहयोग करेंगे।"

"ज़रूर साहब.. ज़रूर... आओ मैं आपको मुखिया जी से मिला दूं।"

इस तरह द्रोण एक पत्रकार की हैसियत से गांव वालों बीच जगह बनाने में कामयाब रहा। मुखिया के यहां ही उसके ठहरने का इंतज़ाम भी हो गया और गांव के लोग उसको पूरा सहयोग देने को राजी हो गए।

द्रोण ने अगले दिन गोरमगढ़ में घूम कर लोगों से पूछताछ की। शाम को मुखिया के घर में अलाव तापते हुए वो विचारों में गुम था...
" यहां आकर ये पता चला है कि अब तक 7 लोग गायब हो चुके है। प्रत्येक व्यक्ति तभी गायब हुआ है जब वो अकेला और गांव की बाहरी जगह पर था। हर शिकार केवल रात में ही हुआ है.. दिन में नहीं।"
 डिटेक्टिव द्रोण का दिमाग तेजी से चल रहा था..."यानी अगर मुझे इस रहस्य तक पहुंचना है तो मुझे भी रात के वक़्त वीरान जगह पर अकेला जाना पड़ेगा!!.... लेकिन उस से पहले मुझे वो पॉइंट भी चेक कर लेना चाहिए जिसे मैं अब तक मिस कर रहा था। प्रो. सिन्हा का कॉटेज.... एक बार वहां भी जाकर देखना पड़ेगा। लेकिन वहां मैं कल दिन में जाऊंगा!" यही सोचते सोचते द्रोण की आंख लग गयी।

अगले दिन वो उठा और अपना बैग तैयार कर चल पड़ा प्रो. के कॉटेज की ओर।

आजकल उस कॉटेज की तरफ जाने से तो जानवर भी डरते थे। सुनसान पगडंडीनुमा सड़क पर हिचकोले खाती उसकी जीप कॉटेज की तरफ बढ़ रही थी। कुछ दूर पहले ही जीप छोड़कर वह धीरे धीरे कॉटेज की ओर बढ़ने लगा। उस जंगली सन्नाटे में दिन के समय भी रात जैसी शांति लग रही थी।  एकाएक डिटेक्टिव को एक झलक दिखी। वो पेड़ के पीछे छुपकर देखने लगा। एक अघोरी जैसे हुलिए वाला आदमी कॉटेज की तरफ बढ़ रहा था।

"ये कौन है?? और यहां क्या कर रहा है??" द्रोण आश्चर्य में पड़ गया।
वो उस अघोरी की तरफ दबे पांव बढ़ा।

अघोरी कॉटेज के पास जाकर रुक गया। उसने झोले से एक हड्डी निकाली और मन्त्र पढ़ने लगा। फिर हड्डी को जमीन से छुआ और कॉटेज के चारो ओर रेखा खींचने लगा। 

ये सब देखकर द्रोण का दिमाग सनसनाने  लगा। जैसे ही अघोरी अपना काम करके रुका द्रोण उस पर टूट पड़ा। अपने ऊपर हुए अचानक हमले से अघोरी चौंक पड़ा। लेकिन जल्दी ही सम्भल कर द्रोण पर प्रहार कर दूर धकेल दिया। अघोरी भागने लगा। लेकिन द्रोण से बचकर भागना मुश्किल था। द्रोण ने जल्द ही उसे काबू कर लिया। 
" बोलो कौन हो तुम?? और यहां कॉटेज के पास क्या कर रहे थे??"
 द्रोण ने कड़क स्वर में पूछा।
"गांव के लोगों के गायब होने का इस कॉटेज से कुछ न कुछ सम्बन्ध ज़रूर है... और ये तुम मुझे बताओगे।"

अघोरी पस्त हो चुका था। उसने समझौता करना ही बेहतर समझा। वो बोला..."मेरा नाम कपाल है। मैं एक तांत्रिक हूँ। मैंने और प्रो.अवतार सिन्हा ने मिलकर यहां एक जलजले को जीवन दे दिया था"....(फ्लैशबैक की तरह उसने गब्बार के जिंदा होने की कहानी सुना दी) जिसे सुनकर द्रोण उछल पड़ा। उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। 
"तो तुम आज यहां क्या करने आये हो?"द्रोण ने कड़क के पूछा।

"दरअसल मैं अपने आपको इस घटना का गुनहगार मानता हूं। मेरी वजह से ही आज वो भयानक मौत इन पहाड़ों में घूम रही है। मैं उसे नष्ट तो शायद नहीं कर सकता लेकिन उसे इस कॉटेज में बांध ज़रूर सकता हूँ। इस रेखा के वजूद में रहते वो कभी इस से बाहर नहीं आ सकेगा।"

" लेकिन हम उसे हमेशा के लिए तो बांध कर नहीं रख सकते ना। कुछ ही दिनों में ये रेखा बेअसर हो जाएगी। फिर हम क्या करेंगे??" द्रोण ने आशंका व्यक्त करते हुए पूछा।
 फिर उसने आगे पूछा.."कपाल.. क्या तुम बता सकते हो कि उसे कैसे मारा जा सकता है??"

कपाल गंभीर स्वर में बोला "उसे गोलियों या तलवारों से नहीं मारा जा सकता। वो इन सबसे परे जा चुका है।
अगर उसे मारना है तो उसका पूरा शरीर एक साथ पूरी तरह से नष्ट करना होगा।"

"ओह! फिर तो उसे अलग तरीके से ही मारना होगा।" द्रोण कुछ सोचते हुए बोला।

"अब मुझे जाने दो द्रोण... मैं तुमसे फिर मिलूँगा... ।"

"अगर मैं पुलिस वाला होता तो तुम्हें नहीं जाने देता। तुम जैसे बेवकूफ दुष्ट के कारण आज ये गांव सात लोगों को खो चुका है और न जाने कितने लोगों पर भयानक खतरा मंडरा रहा है। लेकिन मैं ये देख रहा हूँ कि तुम पश्चाताप की अग्नि में झुलस रहे हो और तुम्हे अपनी गलती का एहसास है। इसलिए मैं तुम्हे जाने देता हूं।"

 " मैं जाता हूं द्रोण... लेकिन इस कॉटेज में दिन मैं भी प्रवेश करने का प्रयास मत करना। इसमें साक्षात मौत विचरण कर रही है।" कहकर कपाल वहां से चला गया।

पूरे दिन द्रोण कॉटेज के आस पास के इलाके का मुआयना करता रहा। उसने कॉटेज के अंदर न जाना ही मुनासिब समझा। शाम को जीप लेकर गांव की तरफ लौटते हुए उसके दिमाग में पूरा प्लान फिट हो चुका था।
 गांव लौट कर आराम से अलाव तापते हुए चाय का कप लेकर वह अपनी योजना को अंतिम रूप दे रहा था। अगले दिन उसने गांव के चार पांच बहादुर लड़के चुने और जीप में बैठाकर कॉटेज की तरफ चल दिया ।अपने प्लान को अंजाम देने के लिए उसने कमर कस ली। सबसे पहले कॉटेज से गांव की तरफ जाने वाले पगडंडीनुमा रास्ते के बीचो बीच 8 फुट गहरा खड्डा खुदवाया और उसे बड़ी सावधानी से पेड़ की डालियों और पत्तों से छुपाकर ढकवा दिया। इस दौरान कुछ लड़कों को 100 लीटर पेट्रोल का केन लाने के लिए शहर भेज दिया गया।
 गढ्ढे का काम निबटा कर उसने गांव के लड़कों को वापस भेज दिया। वो उनकी जान खतरे में नहीं डालना चाहता था। द्रोण अब तैयार था। इधर गब्बार का मुर्दा कॉटेज से बाहर नहीं आ पा रहा था। कॉटेज उसकी गुर्राहटों से गूंजने लगा। अब बारी थी गब्बार को बाहर लाने की। द्रोण अब कॉटेज की ओर बढ़ा और जाकर वह रेखा मिटा दी और कॉटेज के पास छुपकर गब्बार के बाहर आने की राह देखने लगा। रात घिरने लगी। सियारों का रुदन शुरू हो गया। उल्लुओं की मनहूस आवाजें सन्नाटे में गूंज उठती। झींगुर तेज आवाज में शोर बिखेरने लगे। इस खून जमा देने वाले माहौल में कॉटेज के बाहर एक आहट हुई। एक भयानक घुटी हुई गुर्राहट के साथ गब्बार का मुर्दा धीरे - धीरे कॉटेज से बाहर निकला। द्रोण की नज़र उस पर जम गई। 

"हर्रर्रर्रर्रर्रर्ररssss.....हर्रर्रर्रर्रर्रर्रर ssss"
मुर्दे की गुर्राहट से द्रोण का कलेजा भी एक पल के लिए कांप उठा। अब बारी थी डिटेक्टिव द्रोण के प्लान के अगले चरण की। अपनी ज़िंदगी खतरे में डाल कर उसके सामने कूद गया वो। मुर्दे की आंखे चमक उठी। वह गुर्राता हुआ द्रोण की तरफ झपटा। चांदनी रात में वो भारी भरकम नीला पड़ा हुआ शरीर, लम्बे नाखून वाले भयानक हाथ और एसिड से जला वीभत्स चेहरा.... मजबूत दिल वाले की भी रूह फना करने के लिए काफी थे। 

"उफ्फ कितना भयानक है ये।" 
तुरंत अपने आप को संभाल के पगडंडी पर दौड़ पड़ा द्रोण। गब्बार उसके पीछे लपका। डिटेक्टिव का प्लान अब तक ठीक चल रहा था। अचानक अंधेरे में ज़मीन पर फैली बेलों से उलझ कर गिर पड़ा द्रोण। उसके प्लान में रुकावट आ गयी थी और ये रुकावट उसकी जिंदगी पर भारी पड़ने वाली थी। शैतान मुर्दा उसके निकट आ पहुंचा था। द्रोण की मौत उसके सामने खड़ी थी। तभी... एक अभिमंत्रित हड्डी का टुकड़ा गब्बार और डिटेक्टिव द्रोण के बीच आ गिरा। मुर्दा एकाएक पीछे हट गया। द्रोण की नज़र अपने मददगार पर पड़ी। कपाल वहाँ आ पहुंचा था। अभिमंत्रित हड्डी फेंक कर उसने द्रोण को तो बचा लिया लेकिन अब वो खुद भयानक खतरे में था। गब्बार अब कपाल की और बढ़ रहा था। इससे पहले कि कपाल वो अभिमंत्रित हड्डी उठा पाता गब्बार के  हाथ कपाल के सीने में जा धंसे।
"ही ही ही... भूख... भूख... खून...."

कपाल हलक फाड़ कर चीख उठा "आsssssss....."

अगले ही पल कपाल के जिस्म को बुरी तरह एक ही झटके में फाड़ डाला गब्बार ने। उसके टुकड़े उठा कर कॉटेज वाले रास्ते की तरफ मुड़ गया वो मुर्दा। लेकिन द्रोण उसे जाने नहीं देना चाहता था। उस भयानक दृश्य को देखकर अपने दिमाग पर काबू पाते हुए वो अभिमन्त्रित हड्डी लेकर मुर्दे की तरफ झपटा। हड्डी देखकर गब्बार पीछे हटने लगा। 

"हर्रर्रर्रर्रर्रर्रर ssss... हर्रर्रर्रर्रर्रर्रर sss की फुफकारे निकल रही थी उसके मुंह से।
उसने कपाल के शरीर को वहीं पटक दिया और धीरे धीरे पीछे हटने लगा। द्रोण उसे पगडंडी पर खोदे गए उस गढ्ढे की तरफ धकेलने लगा। गुर्राहट के साथ पीछे हटता गब्बार उस गढ्ढे में जा गिरा। इसी पल कई लीटर पेट्रोल की बौछार से भीग गया उसका जिस्म। शहर से मंगाए पेट्रोल का केन वहीं छुपा के रखवा दिया था द्रोण ने। भयानक तरीके से चीखता हुआ गढ्ढे से बाहर आने के प्रयास करने लगा वो मुर्दा। 
अगले ही पल द्रोण ने आग का एक शोला दाग दिया उस शैतान पर। भयंकर चीत्कार कर उठा वो मुर्दा। मानो पचासों भेड़िये एक साथ रो पड़े हों।
 रात का सन्नाटा उसकी गुर्राहटो से गूंज उठा। उसका शरीर धीरे धीरे राख में तब्दील होने लगा। पेट्रोल की आग काफी समय तक जलती रही। धीरे धीरे लपटें बुझने लगी। गढ्ढे में बाकी रह गयी गब्बार की कुछ हड्डियां और राख।

भोर का उजियारा फैलने लगा। एक भयानक आतंक का खात्मा हो चुका था। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वाले भी भयानक अंत के भागीदार बने थे। गांव के लोग धीरे धीरे वहां इकट्ठा होने लगे। कपाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया और उनकी अस्थियों के साथ ही गब्बार की हड्डियों का भी विसर्जन कर दिया गया। गांव वाले डिटेक्टिव द्रोण को धन्यवाद दे रहे थे।

द्रोण उस गांव से रोमांचक और भयानक यादें लेकर लौट पड़ा वापस शहर की ओर। ये सोचता हुआ कि...
"कौन विश्वास करेगा मेरी बातों पर...????"

समाप्त।

कहानी के बारे में अच्छे/बुरे विचार ज़रूर जानना चाहूंगा।

विदा।

8 comments:

  1. पढ़ते पढ़ते रोंगटे खड़े हो गए थे ।
    अच्छी सस्पेंस वाली कहानी है ।

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  2. पढ़ते पढ़ते रोंगटे खड़े हो गए थे ।
    अच्छी सस्पेंस वाली कहानी है ।

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  3. पढ़ते पढ़ते रोंगटे खड़े हो गए थे ।
    अच्छी सस्पेंस वाली कहानी है ।

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  4. शानदार horrer कहानी

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  5. शानदार horrer कहानी

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