सुरेश के लापता होने की रिपोर्ट हुए 4 साल बीत गए थे। धीरे धीरे वो शॉर्टकट बदनाम होता गया और लोगों के कदम उधर पड़ना बन्द हो गए। पुलिस धूल में लठ्ठ में मार मार कर थक चुकी थी। इसलिए अब ये केस दिया गया पुलिस के सबसे तेज तर्रार इंस्पेक्टर राणा को। लेकिन वो भी अभी तक कुछ खास नही कर सका था। तभी एक दिन इंस्पेक्टर राणा अपनी जीप में सवार होकर इस केस के बारे में ही सोचता हुआ जा रहा था कि अचानक एक फटेहाल आदमी उसकी जीप से टकराया। जीप के ब्रेक लग गए। इंपेक्टर राणा जीप से नीचे उतरा और उस फटेहाल आदमी को देख कर चौंक पड़ा। वो और कोई नहीं पागल कमल था। उसने उस हुलिए में भी कमल को पहचान लिया। " ओह ये तो वही कमल है ना?? अपने केस वाला??!!" राणा ने चौंकते हुए कहा। "हां साब, ये वही है। लेकिन अब पागल हो गया है। अपने किसी काम का नहीं। पुलिस पहले भी इस से पूछताछ की कोशिश कर चुकी है साब। पर ये उटपटांग गप्पे हांकता है।" हवलदार ने जीप से उतरते हुए कहा। "लेकिन ये यहां क्या कर रहा है?" इंस्पेक्टर राणा ने हैरानी से पूछा। "साब पागलखाने से भाग गया होगा। कई बार पहले भी भागा है। अपने किसी काम का नहीं है साब।" हवलदार ने लापरवाही से कहा।
"शटअप हवलदार! इसे उठाओ और जीप में डालो।" इंस्पेक्टर ने कड़क कर कहा।
राणा उसे पागलखाने ले आया। और हल्के इलाज के बाद उसे होश आया। तब तक डॉक्टर से उसने कमल की पूरी जानकारी ले ली। होश में आते ही कमल जोर से हंसने लगा।" हा हा हा हा.... शॉर्टकट..... शॉर्टकट....सर कट गया... सर कट गया... मेरा भी सर काट लेगा... भागो.. भागो.....!!!!" और फिर डर के मारे दहाड़े मार के रोने लगा।
डॉक्टर और अन्य स्टाफ ने उसे शांत करने की कोशिश की और उसे नींद का इंजेक्शन देकर फिर से सुला दिया गया।" ये क्या बड़बड़ा रहा था डॉक्टर?" ई. राणा ने आश्चर्य से पूछा। "कुछ नहीं कह सकते इंस्पेक्टर! इसके दिमाग पर पता नहीं किस घटना का असर पड़ा है। ये जब पहली बार यहां भर्ती हुआ था तब से यही बाते बड़बड़ाता है। वैसे आपको इससे कोई मदद मिलने की उम्मीद नहीं है।" डॉक्टर ने धीरे से कहा।
"मैं 15 मिनट के लिए इससे बातें करना चाहूंगा डॉक्टर। चाहे इससे कोई मदद मिले या न मिले पर मैं जानना जरूर चाहूंगा कि ये कहना क्या चाहता है!!"
"ठीक है इंस्पेक्टर, आप चाहे तो इसके होश में आने के बाद कुछ देर इससे बात कर सकते हैं।" डॉक्टर ने कहा।
कुछ देर बाद ही इंपेक्टर और कमल आमने सामने थे।
इंपेक्टर राणा गौर से कमल के हाव भाव देख रहा था।
"तुम्हारे साथ क्या हुआ कमल?" इंपेक्टर ने हौले से पूछा। इस सवाल के साथ ही मानो कमरे में भूचाल सा आ गया। कमल बेकाबू सा होकर चिल्लाने लगा। बड़ी मुश्किल से उसे काबू किया गया। इंपेक्टर गौर से उसके शब्द सुनने लगा। " शॉर्टकट... शार्ट कट... सिर कट गया.... मेरा भी सिर काट देगा वो... "!
"आखिर ये शॉर्टकट क्या बला है। और किसने किसका सिर काट दिया। मुझे एक बार फिर से इस केस की फ़ाइल गौर से पढ़नी पड़ेगी।" राणा का दिमाग अब तेजी से चलने लगा था।
उसी रात बैठ कर राणा ने केस को दोबारा स्टडी किया।
केस की फ़ाइल का आखिरी पन्ना पढते हुए उसकी आँखों के सामने केस की एक धुंधली सी तस्वीर सामने आ रही थी। उसके दिमाग में कमल का एक शब्द बार बार गूंज रहा था... शॉर्टकट।
अगले दिन सुबह उसने पता किया कि दूसरे शहर जाने के लिए मैन हाईवे के अलावा और कौन कौन से रास्ते हैं। लोगों से पूछताछ में उसे पता चला कि एक हाईवे से एक शॉर्टकट अलग होता है लेकिन अब वो कोई इस्तेमाल नहीं करता।
इंस्पेक्टर राणा समझ चुका था कि इस केस को अगर सुलझाना है तो उसे उस शॉर्टकट से गुजरना ही पड़ेगा।
और अगली रात एक कार दो लोगों को लिए उस शॉर्टकट की तरफ बढ़ी जा रही थी। उसमें सवार थे इंस्पेक्टर राणा और हवलदार जोर सिंह। दोनों ही बहादुर और मजबूत दिल वाले थे। लेकिन रास्ते के सूनेपन और भयावहता से उनके भी माथे पर पसीने की बूंदे चमक रही थीं। तभी गाड़ी एक झटके के साथ रुक गयी।
ठीक उसी तरह जैसे कमल और सुरेश की रुकी थी। इंस्पेक्टर राणा ने घड़ी देखी। 12:30 का वक़्त हुआ था। हल्की सी झुरझुरी दौड़ गयी थी दोनों के जिस्म में। 15 मिनट के इन्तेज़ार के बाद इंपेक्टर राणा कार से बाहर निकला। उसे उम्मीद थी कार पर हमला होगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ था। अब वो कार के बाहर उस बियाबान सन्नाटे में खड़ा था। हवलदार जोर सिंह को उसने अंदर ही रहने और बैक अप के रूप में तैयार रहने को बोल दिया। पूरी तैयारी के साथ आये थे दोनों। इंपेक्टर राणा की नज़र गयी उसी भयानक हवेली पर और उसके कदम भी चल पड़े उस हवेली की तरफ। बड़ी सावधानी से बढ़ रहा था वो उस तरफ बिल्कुल चीते की मानिंद। किसी टूटी खिड़की से वो हवेली के अंदर प्रविष्ट हुआ।
अंदर आते ही उसे कुछ तीव्र आवाजे सुनाई दी। मानो कोई मंत्रोच्चार हो रहा हो। वह उस आवाज की दिशा में बढ़ चला। धीरे धीरे कदम बढाता वो हवेली के बीच हॉल में पहुंचा। दरवाजे से झांक के देखा तो उसकी रूह फना हो गयी।
आखिर क्या देखा था इंस्पेक्टर राणा ने हवेली में...?
क्या रहस्य था उस शॉर्टकट और उस हवेली का???
क्या इंस्पेक्टर राणा सुरेश के साथ हुए घटनाक्रम का पर्दा फाश कर सका??
या खुद ही शिकार बन गया इस शॉर्टकट का..???
जल्द ही पता चलेगा अगले अंक में...
तब तक के लिए विदा।
आपकी कहानी ने मुझे बिल्कुल बांधकर रखा है बहुत बेहतरीन लिखते है आप
ReplyDeletethank u very much...
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